हमने तुमसे कहा कि .... ....
जिंदगी... वो नहीं जो हम सोचते हैं
जिंदगी तो वो है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है
जो हमें नई सोच, नई उमंग के साथ
जीने के लिए प्रोत्साहित करती है
यह सोचते ही एहसास हुआ की जिंदगी क्या है
और हम उसे क्या समझ रहे थे
जिए किसके लिए, किसलिए जिए
'ताकि' आखरी वक़्त में यह न सोचना पड़े
'ताकि' आखरी वक़्त में यह न सोचना पड़े
की कुछ फैसले गलत हुए
नहीं तो जिंदगी की तस्वीर कुछ और होती
गुजर तो गयी पर एक कसक बाकी रही नहीं तो जिंदगी की तस्वीर कुछ और होती
क्या हुआ जो साथ छूट गए सारे
क्या हुआ जो सपने टूट गए सारे
फिर भी चलती रहेगी
इन सबके परे है जिंदगी
जिंदगी है एक अनसुलझी पहेली
सुलझाने की कोशीश बहुत से लोगों ने की
दिवा स्वप्न की भांति, 'पूर्णता' का नाम नहीं है जिंदगी
यथार्थ या यथाबोध में,कठोर धरातल की तरह सपाट है जिंदगी
कभी सोचा था जो, वो थी मात्र
स्वप्नों की परोक्ष शुरुआत
और आज है जो, मेरे सामने
वो है प्रत्यक्ष हकीकत ।
अब समझ आया
कितना अंतर है सोचने और जीने में ।

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