Sunday, 28 August 2011

क्यूँ ?

क्यूँ जिंदगी के पन्ने पलटते हैं ?
क्यूँ रस्ते हमेशा बदलते हैं ?
क्यूँ जिंदगी नया मोड़ लेती है ?
क्यूँ वह टेड़ी-मेडी होती है ?
क्यों रात में सन्नाटा छाता है ?
क्यूँ दिन में सूरज आता है ?
कहाँ जाता है वह जो मर जाता है ?
क्या लौट के फिर पाता है ?
क्या रोज एक तारा टूटता है? 
क्या शीश महल सिर्फ फूटता है ? 
क्यूँ बताना मुश्किल होता है ,
जो दिल में वाकई होता है ?

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