लोग अपने आप आगे बढ जाते है !
न जाने यो जाने को, कहाँ से आते है ?
जीवन के सब हारे सबक, सीख़ हमें सिखाते हैं ,
जो देते हैं अतंतः वही पाते हैं |
कुछ किस्से हमेशा पर याद रह जाते हैं ,
गुमनाम ही सही, अलफ़ाज़ मगर खो भी कहाँ पाते है ?
बदलते वो मिजाज एक बार फिर बदल ही जाते हैं ,
भुलाए वो यार आज फिर याद आते हैं |
दफ़न किये किस्से न फिर दोहराए जाते है ,
न ही उन पे पड़ी धुल ही कभी हटाते है |
वकत के लम्हे यूँही आगे बड़े जाते है ,
साथ मैं अपने वो हमें भी खींच लाते है |
समय अपने साथ सब जन कम ही लाते हैं,
बहुत कम उसमे दिलों को छु पाते हैं |
अपना जीवन जी, कुछ लोग, दुसरो को जीना सिखाते हैं,
साथ रखने के लिए पर सिर्फ यादें दे जातें हैं |
और लोग भी धीरे-धीरे, अपने आप
एक बार फिर से आगे बढ जाते हैं |