शबनबी बूंदों से छू लेते हैं
वो एहसास हमें,
आँख खोल कर देखती हूँ
तो तुम दिखते नहीं हो
कहाँ हो तुम ? मेरे पास हो तुम ?
जब भी कांटो ने किया जख्मी मुझे
अपनों ने दी आंसुओ की सौगात
वो तुम्हारा साथ था
वो तुम्हारा ही हाथ था
जिसने मुझे जीने को प्रेरित किया
एक बार फिर मुस्काना सिखाया
कहाँ हो तुम? मेरे पास हो तुम?
दिखते नहीं हो पर साथ हो तुम ....
यह अकिंचित एहसास जो जीने का सार है
राह की हर मुश्किल में तू मेरे साथ है
दुर्गम उन मोड़ो पर
ठिठके उन कदमो में -
तू बस मेरे साथ है !
और क्या चाहा मैंने , बस तेरा ही साथ चाहा
निकल कर एहसासों से स्पर्श कर जीना चाहा
छूना चाहा , सहलाना चाहा
कहाँ है तू ?
मेरे पास है ?
हाँ यह मुझे एहसास है !
की तू मेरे साथ है |
की तू मेरे साथ है |
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